मंगलवार, 21 जून 2011

मासूमियत में मासूम आक्रोश और मासूम दृढ़ता (वाणी शर्मा )



वाणी शर्मा ... कब मिलीं , किस तरह पहचान बनी , कितनी अपनी लगीं , कितनी परायी ...... ऐसा कुछ भी तो
याद नहीं , बस याद है वह तारीख जब मैंने उनको पढ़ा 'गीत मेरे' पर 'ज़िन्दगी मुझसे यूँ मिली ; ' के माध्यम से और
इन पंक्तियों ने मुझसे कहा - 'फिर आना'
ज़िन्दगी पहले न लगी इतनी भली
जब तलक उससे मैं मैं बनकर न मिली ....(११ अप्रैल २०१० ,) ज़िन्दगी से मैं बनकर मिलना यानी खुद्दारी के लिबास में
--- मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने वादा किया ... जब जब शब्द मुझे आवाज़ देंगे , मैं आउंगी .....
ब्लॉग का परिचय अनदेखा विस्तार पाने लगा और मैंने पाया कि जंजाल से वह कोसों दूर रहना पसंद करती हैं और शालीनता
पहनावे में ही नहीं, कुछ भी पूछने में है ..... यह भी याद नहीं, कब मैं आप से तुम पर आ गई ! पर सारी स्वभाविकता में मैंने
एक लेखिका का सम्मान बनाये रखा . एक बार मेरी दी गई टिपण्णी पर उन्होंने पूछा ' वाणी जी क्यूँ लिखा ' ... मैंने उतनी ही सहजता से
बताया कि 'ब्लॉग पर तुम्हारी एक अलग छवि है और यह 'जी' उस छवि का सम्मान है ' किसी छोटे बच्चे की तरह उन्होंने एक सहज मुस्कान
बनाकर भेज दिया .
'मासूमियत में मासूम आक्रोश और मासूम दृढ़ता' आपके अन्दर इस शीर्षक से कई प्रश्न सर उठा रहे होंगे , वाणी जी के अन्दर भी सवाल
होंगे ... तो खुलासा करूँ . 'वटवृक्ष' के प्रथम अंक में उनके परिचय में उनकी बेटी का परिचय पता नहीं कैसे गडमड होकर छप गया और उन्होंने
अहले सुबह मेरे मेल की शिकायत पेटी में शिकायत लिखकर भेजा ... मैंने लिखा ' हाहाहा , देखा मैंने ' तो झट से गोली चली - 'आपको हंसी आ
रही है , मुझे गुस्सा ' मुझे यह अधिकार भरा ढंग बहुत अच्छा लगा और मेरे यह कहते कि आरंभिक कदम में गलतियां हो जाती हैं , वे शांत हो गईं
........... इसे मासूम आक्रोश ही कहेंगे न !
अब आऊं मासूम दृढ़ता पर - तो उसकी व्याख्या ज़रूरी नहीं , पर अनचाहे को परे करने की दृढ़ता उनमें है और बड़ी शालीनता और मासूमियत
भरे लहजे में . ये तो मेरी कलम की बातें थीं , अब वाणी शर्मा को एक पहचान के रूप में उसी ढंग से कहना चाहूंगी ---
वाणी शर्मा
शिक्षा ...एम .ए. ...
रुचियाँ ...पढना , पर्यटन , संगीत , बागवानी आदि

प्रकाशित ... हिंदी ब्लॉगिंग से शुरू हुआ लेखन का सफ़र अब पत्र -पत्रिकाओं तक पहुँचने लगा है ...डेली न्यूज़ , हिंदी ब्लॉगिंग "अभिव्यक्ति की नई क्रांति" , वटवृक्ष , अनुगूँज आदि ..

इनके ब्लॉग ... ज्ञानवाणी
और गीत मेरे...


सामूहिक ब्लॉग्स
" कबीरा खड़ा बाज़ार में
", परिचर्चा
, पिताजी
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, प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ
पर भी सदस्य हूँ ...

वाणी के शब्दों में -
वाणी ...प्रकृति द्वारा रचित अनूठे वृहद् संसार में अकिंचन बूँद -सी जिसे जीने को , कुछ नया सीखने को एक जन्म कम ही लगता है ...अपने अस्तित्व को तलाशते शब्दों के अथाह संसार से कुछ शब्द चुन कर उन्हें करीने से लगाने का प्रयास करते हुए साधारण में असाधारण होने की सम्भावना रखती एक गृहिणी .... जब तक जीवन है, हौसलों की उन्मुक्त उड़ान है और मैं हूँ ...

बचपन से अब तक का सफ़र

जन्म सितम्बर 1965, हैदराबाद में हुआ .....शिक्षा बिहार और राजस्थान में हुई .....ज्ञानवान जिम्मेदार पति से विवाह के पश्चात गृहिणी और दो बहुत प्यारी बेटियों की माँ होने का उत्तरदायित्व निभाते हुए परास्नातक की डिग्री प्राप्त कर स्कूल में पढ़ाने , कंप्यूटर सिखाने , अपनी पत्रिका का लेखन व संपादन से लेकर गिफ्ट शॉप तक सँभालने का हर कार्य किया ...अब तक सफलता और असफलता का चोली -दामन सा साथ जीवन भर रहा है ...

पारंपरिक परिवार की बेटी और बहू होने तथा परम्पराओं का पालन करते हुए भी रूढ़ियों को जस का तस नहीं मानती हूँ ... प्यार ,सम्मान और नफरत, उपेक्षा समान प्रतिशत में झेली है ... जीवन के सफ़र में हर तरह के लोगों से वास्ता पड़ा ...बेवजह ईर्ष्या, द्वेष पालने वाले भी मिले तो बेइंतहा प्यार और सम्मान देने वाले भी ...अपने आस- पास उस ईश्वर की उपस्थिति को हमेशा महसूस करती हूँ ...उसकी असीम कृपा रही है , हर असफलता के बाद भी हार नहीं मानने के अवसर प्रदान कर देता है ....

34 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा परिचय दिया वाणी जी का । यदा कदा उनसे रूबरू होते रहते हैं । हालाँकि ज्यादा नहीं पढ़ पाया उन्हें । परन्तु आपने जिस आत्मीयता का परिचय दिया वह काबिले तारीफ लगा ।

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  2. रश्मि दी ! आपकी नजरों से सबको देखना अच्छा लग रहा है.वाणी जी के ब्लोग्स नियमित पढ़ती हूँ उनके व्यक्तित्व से रू ब रू कराने का आभार.

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  3. वाणी जी की मासूमियत के अलग अलग पहलु को जानना, पढ़कर समझना अच्छा लगा...!

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  4. वाणी जी की मासूमियत के अलग अलग पहलु को जानना, पढ़कर समझना अच्छा लगा...!

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  5. बहुत विस्तृत परिचय दिया वाणी जी का..आभार

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  6. bhut hi accha parichaye diya apne... madam apko bhut bhut dhanyawaad ki itna vistart parichye karaya....

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  7. रश्मि जी ,

    बहुत अच्छा लग रहा है आपके माध्यम से परिचय ... इनको नियमित पढते हैं पर इस श्रृंखला से वाणी जी के बारे में जानना अच्छा लगा .. इनकी कविताएँ तो गहन अर्थ संजोये होती ही हैं इस बार तो कहानी भी बहुत सशक्त ले कर आयीं थीं ... आभार

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  8. वाणी जी के बारे जानना अच्छा लगा |
    परम्पराओ का साथ निबाहते हुए अपन एक मुकाम बनाना वाणीजी के व्यक्तित्व की खूबी है|
    आभार |

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  9. वाणी जी के जीतने की सनक ...ध्रुवतारा ...चाय ...मौन ...प्रेम ...ज़िन्दगी से जुडी,स्त्री जीवन से जुडी ...स्त्री मन से जुडी कितनी ही बातों पर बहुत गहन ...उच्च कोटि की रचनाएँ हैं ...!!बहुत बढ़िया ल्र्खन है ...रश्मि दी आपका आभार वाणी जी का परिचय अपनी कलम के माध्यम से देने के लिए...!!
    वाणी जी आपको बहुत बहुत शुभकामनायें ...!!

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  10. वाणी जी का परिचय ..वो भी इतने सहज और सरल शब्‍दों में छोटी-छोटी बातों से आपने कितनी बड़ी समीक्षा लिख दी है न उनके लिये ... आपकी यह खूबी हर बात को याद रखना किसने कब क्‍या कहा और आपने उसे कैसे लिया वाह ... बहुत खूब कलम का जादू यूं ही चलता रहे और सबके परिचय के साथ-साथ आपका यह योगदान बढ़ता चले ..।

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  11. वाणी जी का परिचय पाकर बहुत अच्छा लगा………आप बहुत बढिया काम कर रही है आपके माध्यम से सबसे रु-ब-रु होने का मौका मिल रहा है …………आभार्।
    आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
    http://tetalaa.blogspot.com/

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  12. वाणी, को काफी करीब से जाना है....उसके लेखन की कायल हूँ...
    सामाजिक विषमताओं पर उसकी कलम {की- बोर्ड :)} खूब चलती है...उनपर चिंता भी...उनका विश्लेषण भी और उन्हें सुलझाने का यत्न भी नज़र आता है...
    कविता-कहानियाँ भी मन की संवेदनशीलता का परिचय देती हैं.
    बहुत ही अच्छा लगा...आपकी और वाणी को खुद उसकी नज़र से देखना...
    ऐसे ही वे ब्लॉग जगत को समृद्ध करती रहें..शुभकामनाएं

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  13. Vani di ka pyara sa parichay ek rashmi di ke shabdo me padh kar samajh me aaya ki sach me waisee hi hain...jaisa hamne socha tha..:)

    god bless to both of you!!

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  14. वाणी जी की मासूमियत के अलग अलग पहलु को जानना,बहुत ही अच्छा लगा...

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  15. इतना लाड़- दुलार मिलता रहेगा तो कौन जीवन भर मासूम नहीं बना रहना चाहेगा ...
    रश्मि जी के साथ सबका बहुत आभार !

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  16. वाणी जी का परिचय आपने बहुत ही सुन्दरता से दिया है! वाणी जी के बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  17. वाणी जी के बारे में इतना कुछ जान कर बहुत अच्छा लगा ..

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  18. जहाँ तक मुझे स्मरण है , टिप्पणियों पर कोई आलेख लिखा था उन्होंने जिस पर मैंने उनके ब्लॉग पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दर्ज कराई थी उस वक़्त मुझे यह नहीं मालूम था कि वे कविता भी लिखती हैं !
    अमूमन ब्लॉग पर रची जा रही कविताओं को लेकर मेरी धारणा बहुत अच्छी नहीं थी जबतक कि उनकी कविताओं से दो चार नहीं हुआ :)
    अब हाल ये है कि उनकी कविताओं में एक क्लास ( शास्त्रीयता ) देखकर मैं अक्सर चमत्कृत हो जाया करता हूं ! कविता और विचार की ऐसी सुसंगति विरले ही देखी है मैंने ! सच कहूँ तो वे मुझे एक दार्शनिक सी लगती हैं ! बस यही एक वज़ह मुझे उनके प्रशंसकों की कतार में खड़ा कर देती है !

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  19. वाणी जी मेरी प्रिय ब्लॉगर हैं -वे समझदार और गरिमा युक्त भी हैं ..लेकिन वहां भी जाती रहती हैं जिनकी सूरत और सीरत दोनों मुझे नापसंद है -मगर यह उनका विवेकाधिकार है !

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  20. एक बहुत ही गम्भीर और निष्ठावान ब्लॉगर से रू-ब-रु होने का अवसर मिला। साथ ही जान पाया कि हैदराबाद का इतना जीवन्त वर्णन कहां से उनकी कहानी में आया।

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  21. वाणी शर्मा जी के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला .....उनकी लेखनी का तो कायल मैं भी हूँ ...!

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  22. वाणी जी का परिचय जानकर सुखद लगा...

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  23. वाणी जी से मिलना बहुत अच्छा लगा ... आप जिनको पसंद से पढते हैं उनके बारे में जानने की जिज्ञासा तो रहती ही है ... ये एक अच्छी शुरुआत करी है आपने ...

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  24. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

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  25. :) di acha laga aap logon ke baare me is tarah se likhti rahi hain

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  26. oh abhi bhi lagta hai ki na jaane aise kitne kalamon se aparichit hi hum reh gaye hai.... vaaniji ka itna maasooomiyat bhara parichay karwane ke liye aabhar!

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  27. Vaani ji ko jaankar bahut achha laga. blog par sirf rachna padhte hain, rachnaakaar se parichay nahin ho pata, parichay karane ka dhanywaad.

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  28. सबसे खास बात , वाणी जी ने अपना परिचय जितना लंबा दिया है उससे ज्यादा तो आपने उनके बारे में लिख दिया |
    ये उनके विशाल किन्तु सहज व्यक्तित्व को दिखाता है , जब लोग खुद आपके बारे में बताएं | :)

    सादर

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  29. मासूमियत में मासूम आक्रोश और मासूम दृढ़ता.... यही हमें भी लगा जितना इन्हें जाना ...
    अच्छा लगा इतना कुछ और जानना |

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  30. हमें भी मौका मिला जानने का :)

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  31. आपके अक्षरों से सहमती
    जानने के बाद आज विस्तार से फिर से जानना सुखद लगा

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