शनिवार, 25 जून 2011

'होनहार बिरवान के होत चिकने पात' (अनुपमा सुकृति )


अनुपमा सुकृति , ब्लौगिंग की दुनिया में हाल में ही इन्होंने कदम बढ़ाये , पर कहते हैं न कि 'होनहार बिरवान के होत चिकने पात' , वही चरितार्थ किया अनुपमा सुकृति ने . हर लेखनी में जीवन का सरल स्पर्श और टिप्पणी में सहजता . वटवृक्ष , परिकल्पना के बारे में बातचीत करते हुए हम चिर परिचित बन गए और मुझे एक और छोटी बहन मिल गई . अब इस प्रश्न में नहीं उलझना है कि 'एक और से तात्पर्य' .... ये कहानी फिर सही !
साधारण सी बात है कि जब सामनेवाला आपकी बातें समझ लेता है ठीक उसी तरह जैसा आप कहना चाह रह तो बहुत अच्छा लगता है , तो मुझे भी अच्छा लगा अनुपमा सुकृति से बातें करके . बातों के दरम्यान मैंने जाना वह गाती है , संगीत में विशारद किया है.... मुझे अपने लिखे गीतों के लिए एक और आधार नज़र आया , मैंने उनको फ़ोन पर पहले सुना , फिर उन्होंने अपने गाये गीत मेल किये , यकीनन जिस खनक की मुझे तलाश थी , वह मिली . गीत बाद में सुनियेगा , पहले एक झलक उनके नाम के साथ उनके काम पर उनके सपनों पर -

: श्रीमती अनुपमा त्रिपाठी
जन्म तिथि :13-05-63.
शिक्षा :एम.ए(अर्थशास्त्र)1984 में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय(जबलपुर) से किया |74%with distinction in Econometrics and Mathematical Economics.
विशारद (संगीत)में 2006 में किया|प्रथम श्रेणी में |अब अलंकार कर रहीं हैं |
व्यवसायिक अनुभव :अर्थशास्त्र की व्याख्याता 1984-85.Jabalpur . हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत पढ़ाया: .2010 में T.F.A.(TEMPLE OF FINE ARTS-K.L.-Malaysia.)में.
पता : 5-B,रेलवे बोर्ड ऑफीसर फ्लैट .
सरोजिनी नगर
नई दिल्ली.110023.
फोन (मोबाईल) : 09350210808.
अपने बारे में बताते हुए अनुपमा कहती हैं .. "ज़िन्दगी में समय से .. वो सब मिला जिसकी हर स्त्री को तमन्ना रहती है ...सच कहूँ तो किसी प्रकार का समझौता नहीं किया कभी भी किसी भी चीज़ से मैंने ..!!इस अदम्य साहस के पीछे है मेरे माता-पिता के द्वारा दी गयी शिक्षा ..संस्कार ..और अब मेरे पति के द्वारा दिया जा रहा वो सुंदर ,संरक्षित जीवन जिसमे वे एक स्तम्भ की तरह हमेशा मेरे साथ रहते हैं |सशक्त ..शांत..धीर ..गंभीर ...!!दो बेटों की माँ हूँ और अपनी घर-गृहस्थी में लीन .....!!"
कला से जुड़ाव : आपको बचपन से ही गीत ,संगीत .नृत्य एवं अभिनय में गहन रूचि थी .भातखंडे महाविद्यालय से आपने शास्त्रीय संगीत और सितार की शिक्षा ग्रहण की |श्रीमती सुंदरी सेशाद्री से भरतनाट्यम सीखा|इन सभी विधाओं में स्कूल में विभिन्न स्तरों पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया एवं अनेकों पुरस्कार अर्जित किये |
१८ वर्ष की आयु में युववाणी ;ऑल इंडिया रेडिओ से जुड़ीं |फिर जबलपुर आकाशवाणी से लोक संगीत में( बी ग्रेड) कलाकार के रूप में प्रोग्राम दिए|
2000-2010 के बीच R.W.W.C.O.रेलवे वूमन वेल्फेयर सेन्ट्रल ओर्गनाइजेशन की सांस्कृतिक सचिव रहकर अनेक कार्यक्रमों में गाया भी और सञ्चालन भी किया|
श्री राधे शरणम् पीठ के लिए भक्ति संगीत दिया |
2010 में T.F.A.(TEMPLE OF FINE ARTS-K.L.-Malaysia.)में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत पढ़ाया |संगीत के कई कार्यक्रमों में गाया और ''यादें '' नामक सी .डी में भी गाकर अपना योगदान दिया |
फिलहाल उपशास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम देती रहतीं हैं और शास्त्रीय संगीत का शिक्षण अनवरत चल रहा है |
लेखन से जुड़ाव :आपकी बचपन से ही साहित्य में गहन रूचि थी |हिंदी,संस्कृत या अंग्रेजी ,कोई भी भाषा हो उसे पढ़ना रुचिकर लगता था |हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में निबंध लेखन में और कविता-पाठ प्रतियोगिताओं में ,वाद-विवाद प्रतियोगिता में अनेक पुरस्कार प्राप्त किये |कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य एक विषय था,अंगरेजी साहित्य भी काफी पढ़ा | |किन्तु ...आपकी माँ संस्कृत की ज्ञाता थीं |उन्हीं की हिंदी साहित्य की किताबों को पढ़ते -पढ़ते हिंदी साहित्य का बीज ह्रदय में रोपित हुआ |समय के साथ-साथ ये बीज प्रस्फुटित हुआ,पल्वित हुआ और धीरे -धीरे एक वटवृक्ष बन गया| अब जीवन की कड़ी धूप से बेचैन होता मन इसकी छाओं में बैठने को तरसने लगा ...!!छटपटाहट बढ़ने लगी ...भीड़ बेचैन करने लगी ..एकान्तप्रिय मन होने लगा ...और इस तरह मन जुड़ गया कलम से भी ..!!आपकी कविता ''मृग मरीचिका नहीं मुझे है जल तक जाना ...!!"की ये पंक्तियाँ बहुत प्रभावित करतीं हैं और ...इस भाव को स्पष्ट करती हैं:
जाग गयी चेतना --
अब मैं देख रही प्रभु लीला --
प्रभु लीला क्या -जीवन लीला ....
जीवन है संघर्ष तभी तो --
जीवन का ये महाभारत --

युद्ध के रथ पर --
मैं अर्जुन ...तुम सारथी मेरे ..
मार्ग दिखाना -
मृगमरीचिका नहीं ---
मुझे है जल तक जाना ...!!!!!!

अब आप अपने ब्लॉग http://anupamassukrity.blogspot.com/ पर लिखतीं हैं |
आपकी कवितायें "नई सुबह" एवं "मन की सरिता" "उन्मुक्ता "नमक पत्रिका में छपी हैं | "अर्चना (२०११के लिए )" "नारी "नामक पत्रिका में छपी है और अब हर अंक में निरंतर छ्प रहीं हैं|
इस प्रकार आपका मन गायन और लेखन से जुड़ा हुआ ...जीवन में आगे बढ़ रहा है .....!!

17 टिप्‍पणियां:

  1. अनुपमा जी के बारे मे विस्तृत जानकारी पाकर अच्छा लगा…………लेखन के अलावा गायन उनका पहला प्यार है जान कर मन प्रसन्न हुआ……………बहुत ही सुन्दर कार्य का सम्पादन किया जा रहा है आपके द्वारा…………आभार्।

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  2. आपका आभार इन से परिचय करवाने के लिए !

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  3. मैं तो इनसे संगीत की शिक्षा ले रहा हूं।

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  4. अनुपमा जी से परिचय अच्छा लगा ... विलक्षण प्रतिभा की धनी हैं ...आपकी कलम के माध्यम से बहुतों को जानने का अवसर मिल रहा है ... इनकी कविताओं की तो मैं कायल हूँ ..आभार

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  5. जै जबलपूर की
    किधर गायब थी ये शख्सियत
    परिचय कराने का आभार

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  6. जय जबलपुर की
    अच्छा लगा परिचय मिला.
    आभार

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  7. आपकी कलम से अनुपमा जी और उनकी प्रतिभा से परिचित होना अच्छा लगा ...
    बहुत शुभकामनायें !

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  8. अनुपमा जी से परिचय अच्छा लगा ...बहुत शुभकामनायें !

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  9. अनुपमा जी से परिचय कराने के बहुत बहुत धन्यवाद! आपकी कलम को भी सलाम कुछ नया देती रहती है.

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  10. अच्छा लगा इनके बारे में जान कर शुक्रिया

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  11. अनुपमा जी के बारे में आपने जितना कुछ कहा ... अच्‍छा लगा इनके बारे में जानकर हम इन बातों से तो अंजान ही रहते यदि आपने यह बेहतरीन प्रस्‍तुति न दी होती ...परिचय की यह महफिल और उसे विस्‍तार देती आपकी कलम हमेशा यूं ही आगे बढ़ती रहे ..आभार के साथ शुभकामनाएं ।

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  12. inhe kabhi padhne ka mauka nahin mila... lekin aapne yahan inka parichay dekar bahut achcha kiya. warna pata nahi kab jaanne ka mauka milta.

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  13. कितना टेलेंट भरा पड़ा है इस ब्लॉग जगत में.आभार अनुपमा जी से परिचय कराने का.

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  14. रश्मि दी आपका आभार ...अपने मुझे एक पहचान दी .....और आप सभी का भी, क्योंकि आपने उस पहचान को भी एक और पहचान दी और एक कड़ी जोड़ दी मेरे परिचय में ...पुनः आभार आप सभी का ...अपना स्नेह बनाये रखियेगा....!!

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  15. अनुपमा मेरी बहुत ही प्यारी सहेली हैं और मैं इसे बहुत समय से जानती हू! Anupama is very talented,hardworking and sincere.She will never compromise on quality and will always do the best possible.I pray the GOD to fulfill all her dreams and she could lead a very satisfying life.

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  16. अनुपमा जी से थोड़ी बहुत पहचान थी , कुछेक बार वो मेरे ब्लॉग पर आयीं , कुछेक बार मैं उनके ब्लॉग पर गया लेकिन आज पता चला कि इतनी सुन्दर कविताओं के पीछे इतना सुन्दर व्यक्तित्व रहता है |

    सादर

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